गोपनीय-चुनावी बॉन्ड लिखना जरूरी, 15 नवंबर तक का समय
राजनीतिक चंदों का तमाम विवरण चुनाव व्यय प्रभाग के सचिव को भेजा जाएगा। चुनाव आयोग ने कहा कि सीलबंद लिफाफे 15 नवंबर की शाम तक उसके पास पहुंच जाने चाहिए। लिफाफों पर स्पष्ट रूप से “गोपनीय-चुनावी बॉन्ड” अंकित होना चाहिए।
करीब 42 महीने पहले भी पारित हुआ आदेश
गौरतलब है कि बीते 2 नवंबर को पारित आदेश में शीर्ष अदालत ने कहा था, चुनावी बॉन्ड से मिले चंदे का विवरण जमा कराने संबंधी “अभ्यास 19 नवंबर, 2023 को या उससे पहले किया जाएगा। एक सीलबंद पैकेट में डेटा सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को सौंपा जाएगा।” मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 12 अप्रैल, 2019 को पारित अंतरिम निर्देश का हवाला दिया।
2019 में चुनावी बॉन्ड योजना पर रोक लगाने से इनकार
शीर्ष अदालत ने करीब साढ़े तीन साल पहले पारित आदेश (अप्रैल, 2019) में राजनीतिक दलों को चुनावी बॉन्ड के माध्यम से प्राप्त धन का विवरण सीलबंद कवर में चुनाव आयोग के समक्ष जमा कराने का निर्देश दिया था। अप्रैल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट कर दिया था कि वह याचिकाओं पर विस्तार से सुनवाई करेगी क्योंकि केंद्र और चुनाव आयोग ने “महत्वपूर्ण मुद्दे” उठाए हैं। सरकार और चुनाव आयोग की दलील है कि इन मुद्दों का देश में चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता पर “जबरदस्त प्रभाव” पड़ेगा।
क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड योजना
बता दें कि चुनावी बॉन्ड योजना केंद्र सरकार ने दो जनवरी, 2018 को अधिसूचित की थी। सरकार का दावा है कि इससे राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता आएगी। सरकार ने राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले नकद दान के विकल्प के रूप में इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पेश की थी। योजना के प्रावधानों के अनुसार, भारत का कोई भी नागरिक या देश में निगमित या स्थापित इकाई चुनावी बॉन्ड खरीदा सकती है। कोई भी व्यक्ति अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से भी चुनावी बॉन्ड खरीद सकता है। चंदा देने वाले की पहचान गोपनीय रहेगी। यहां तक कि आरटीआई की मदद से भी इसकी जानकारी नहीं हासिल की जा सकती।
किसे मिलता है चंदा, भुनाने का नियम क्या?
नियमों के मुताबिक जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत पंजीकृत राजनीतिक दलों को ही चुनावी बॉन्ड से चंदा हासिल करने का अधिकार होगा। ऐसे दल जिन्हें लोकसभा या राज्य विधान सभा के पिछले चुनाव में कम से कम एक प्रतिशत वोट मिले हों, वे बॉन्ड की मदद से चंदा हासिल कर सकते हैं। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, चुनावी बॉन्ड भारतीय स्टेट बैंक से जारी होंगे और इसे योग्य राजनीतिक दल की तरफ से केवल अधिकृत बैंक के खाते के माध्यम से ही भुनाया जा सकेगा।