पलपल इंडिया प्रतिनिधि , जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने गुरुवार को यह अहम फैसला दिया। शादी के बाद भी महिला हिंदू धर्म व पुरुष इस्लाम का पालन करते रहेंगे, इसलिए कोर्ट ने सुरक्षा मांगने वाली याचिका खारिज कर दी। विशेष विवाह अधिनियम के तहत मुस्लिम लड़के और हिंदू लड़की के बीच अंतर-धार्मिक विवाह मुस्लिम कानून के तहत मान्य नहीं
हाईकोर्ट का आदेश
जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया ने कहा, मुस्लिम लड़के व हिंदू लड़की की शादी को मुस्लिम पर्सनल लॉ में अनियमित विवाह माना जाएगा, भले यह विशेष विवाह अधिनियम के तहत किया हो। कोर्ट ने कहा, मुस्लिम लॉ में मुस्लिम लड़के का मूर्तिपूजक या अग्नि-पूजक से विवाह वैध नहीं है। भले ही विशेष विवाह अधिनियम के तहत पंजीकृत हो, विवाह अब वैध विवाह नहीं होगा और यह एक अनियमित (फासीद) विवाह होगा।
कोर्ट ने कहा, विशेष विवाह अधिनियम में किसी विवाह को धार्मिक अनुष्ठानों का पालन न करने को चुनौती नहीं दी जा सकती, पर व्यक्तिगत कानून के तहत प्रतिबंधित है तो ऐसी शादी कानूनी शादी नहीं होगी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि दोनों के बीच रिश्ते का लड़की के परिवार ने विरोध किया क्योंकि आशंका थी कि अंतर-धार्मिक विवाह पर समाज में बहिष्कार होगा। परन्तु लड़की नहीं मानी तथा लड़की ने मुस्लिम साथी से शादी करने के लिए घर से आभूषण भी ले गयी। दम्पति विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह करना चाहते थे। न्यायालय को बताया कि न तो महिला और न ही पुरुष विवाह के लिए किसी अन्य धर्म को अपनाना चाहते हैं। महिला हिन्दू धर्म का पालन करना जारी रखेगी, जबकि पुरुष विवाह के बाद भी इस्लाम का पालन करना जारी रखेगा। दम्पति को पुलिस सुरक्षा दी जानी चाहिए ताकि वे विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना विवाह पंजीकृत करा सकें।
कोर्ट ने युगल की याचिका को यह देखते हुए खारिज कर दिया कि वे न तो बिना विवाह किए लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए तैयार थे और न ही लड़की (हिंदू व्यक्ति) लड़के के धर्म (इस्लाम) को अपनाने के लिए तैयार थी।