10000 से ज्यादा किताबें पढ़ चुके हैं तीसरी पास किसान उकाभाई वासिया ने अपने लिए खेत में बनाई लाइब्रेरी

By: PalPal India News
November 6, 2023

palpalindianews/jabalpur

आपने ऐसे बहुत से लोग देखे होंगे जिन्हें किताबे पढ़ने का काफ़ी शौक होता है और वह अपना ज़्यादातर समय किताबों के साथ बिताना पसंद करते हैं! लेकिन यह कहानी जिनके बारे में है वह कोई आम पुस्तक प्रेमी नहीं। यह हैं गुजरात के अंबावद गांव के रहने वाले उकाभाई वघासिया, जो पेशे से एक किसान हैं और स्कूली शिक्षा के नाम पर केवल तीसरी कक्षा तक ही पढ़े हैं। लेकिन किताबों के प्रति उनका लगाव ऐसा है कि चार लोग देखते रह जाएं!! उन्होंने अपने खेत में ही एक निजी लाइब्रेरी बनाई है।
वह पन्नालाल पटेल, रघुवीर मेघानी, गाँधीजी, ध्रुव भट्ट, रघुवीर चौधरी, जैसे प्रतिष्ठित लेखकों के साथ-साथ बहुत से आधुनिक लेखकों को पढ़ चुके हैं। हालांकि, उनका कोई एक पसंदीदा लेखक नहीं हैं; बल्कि उन्हें तो हर तरह की लेखन रचनाएं पसंद हैं। वह आध्यात्मिक, धार्मिक, कहानी, उपन्यास, कविताएं, आत्मकथा और जीवनी पढ़ने का शौक़ रखते हैं। एक और दिलचस्प बात यह है कि उकाभाई जब भी कोई नई किताब पढ़ लेते हैं, तो उस किताब के लेखक को पत्र लिखकर उसपर अपना फीडबैक भी ज़रूर देते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि जब उनसे पूछा गया कि वह अब तक कितनी किताबें पढ़ चुके हैं तो उनका जवाब था- “एक निश्चित नंबर बताना तो मुश्किल है, लेकिन लगभग 10 से 11 हज़ार तो पढ़ीं होंगी…”
उकाभाई को बचपन से ही किताबों से प्रेम है। उनके परिवार में स्वाध्याय यानी सेल्फ एजुकेशन का चलन था, जिससे उन्हें जीवन को अलग तरह से देखने का नज़रिया मिला। शायद इसी का असर था कि उन्होंने किताबें पढ़ना और उन्हें खरीदकर घर में सहेजकर रखना शुरू किया। साथ ही उकाभाई अपने खेत में बने घर में ही रहते हैं; जहाँ खुला वातावरण, सूरज की पर्याप्त रौशनी और शांति रहती हैं.. जो किताबें पढ़ने के लिए सबसे अच्छा माहौल बनाते हैं। उन्हें जब भी कोई किताब पढ़नी होती है तो वह दोपहर में कम खाना खाते हैं, ताकि नींद न आए और इस तरह शांति से बिना रुकावट के पूरे ध्यान से पुस्तक पढ़ते उकाभाई पढ़ते वक़्त ध्यान में लीन हो जाते हैं। वह हमेशा किताब खुद खरीद कर पढ़ना पसंद करते हैं। जब भी कोई नई किताब पब्लिश होती है तो उकाभाई तुरंत उसे खरीद लेते हैं। वह अब तक पुस्तकों पर लाखों रुपये भी खर्च कर चुके हैं। उकाभाई किताबों को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानते हैं और कहते हैं- “मैं किताबों के साथ जीता हूँ और किताबों के साथ ही मरना चाहता हूँ। किताबें मेरी सबसे अच्छी दोस्त हैं। मेरे सरल और स्वस्थ जीवन में इन किताबों का अहम योगदान रहा हैं।”

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