नई दिल्ली। भारत में एक बार फिर कोरोना के सक्रिय मामले 1,000 के पार पहुंच चुके हैं। इसी बीच, 2021 में हुई मौतों को लेकर एक सरकारी रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज ऑफ डेथ (MCCD) रिपोर्ट 2021 के अनुसार, उस वर्ष लगभग 20 लाख अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं। रिपोर्ट को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) के तहत जारी किया गया है विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि मुख्यतः कोविड-19, लॉकडाउन के प्रभाव और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच के कारण हुई। रिपोर्टिंग और सर्टिफिकेशन की कमी भी इस अंतर का बड़ा कारण रही।
क्या होती है ‘मेडिकली सर्टिफाइड डेथ’?
मेडिकली सर्टिफाइड डेथ का मतलब है ऐसी मृत्यु, जिसकी वजह को किसी पंजीकृत डॉक्टर या मेडिकल विशेषज्ञ द्वारा प्रमाणित किया गया हो। इस प्रक्रिया से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि किस उम्र वर्ग में किस बीमारी से ज्यादा मौतें हो रही हैं। इससे नीति निर्माण, बजट आवंटन और स्वास्थ्य योजनाएं बेहतर बनाई जा सकती हैं।
मौतों के कारणों का विश्लेषण
रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में हार्ट की बीमारियां और कोविड-19 मौतों के प्रमुख कारण रहे।
0-4 वर्ष की आयु के बच्चों में कोविड का कोई विशेष असर नहीं दिखा।
5 से 24 वर्ष के युवाओं में मौत का मुख्य कारण दुर्घटनाएं, ज़हर और गंभीर चोटें रहीं।
15 से 24 वर्ष की उम्र के बीच हार्ट अटैक से मौतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
25 से 44 वर्ष के आयुवर्ग में हार्ट डिजीज के बाद कोविड दूसरी सबसे बड़ी मौत की वजह बना।
45 वर्ष से ऊपर के लोगों में 35% मौतें दिल की बीमारियों से हुईं।