नई दिल्ली। भारत सरकार पासपोर्ट प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है। इसके तहत सुरक्षा को बढ़ाने और प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए चिप-युक्त ई-पासपोर्ट जारी किए जा रहे हैं। इसके अलावा पासपोर्ट से अब रेज़िडेंशियल एड्रेस हटाया जाएगा और बदलते पारिवारिक ढांचे को देखते हुए अभिभावकों के नाम शामिल करने की आवश्यकता नहीं होगी। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक देशभर में पासपोर्ट सेवा केंद्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की जाए, ताकि ज्यादा लोगों को आसानी से पासपोर्ट सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
पासपोर्ट 2.0: डिजिटल युग में भारत का कदम
भारतीय पासपोर्ट अब पूरी तरह डिजिटल युग में प्रवेश कर चुका है। वर्ष 2025 तक इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा, गोपनीयता और सुगमता को बेहतर बनाना है। यदि आप पासपोर्ट बनवाने या रिन्यू कराने की सोच रहे हैं, तो ये 5 बड़े बदलाव आपके लिए जानना जरूरी हैं:
1. ई-पासपोर्ट की शुरुआत
गोवा, रांची समेत कुछ शहरों में चिप-सक्षम ई-पासपोर्ट की शुरुआत हो चुकी है। इन पासपोर्ट में एक इलेक्ट्रॉनिक चिप होती है, जिसमें बायोमेट्रिक जानकारी और व्यक्तिगत डेटा जैसे फिंगरप्रिंट व तस्वीरें सुरक्षित रूप से संग्रहित होती हैं।
2. सुरक्षा होगी और मजबूत- ई-पासपोर्ट से पहचान की चोरी और धोखाधड़ी की आशंका काफी हद तक कम होगी। यह नया सिस्टम इमिग्रेशन प्रक्रिया को तेज और अधिक सुरक्षित बनाएगा।
3. एड्रेस नहीं होगा प्रिंट- अब पासपोर्ट में रेजिडेंशियल एड्रेस छापा नहीं जाएगा, जिससे प्राइवेसी का बेहतर ध्यान रखा जा सकेगा।
4. पैरेंट्स के नाम की अनिवार्यता खत्म- बदलते सामाजिक ढांचे को देखते हुए अब पासपोर्ट में माता-पिता या अभिभावकों का नाम देना अनिवार्य नहीं रहेगा।
5. 2030 तक सेवा केंद्रों की संख्या बढ़ेगी- सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक देश के हर हिस्से में पासपोर्ट सेवा केंद्र स्थापित किए जाएं, जिससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को भी आसानी से सेवा मिल सके।