पलपल इंडिया प्रतिनिधि। बीते फरवरी माह में रीवा के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल से एक बड़ा मामला सामने आया था. जिसमें अस्पताल में डिलेवरी कराने आई 5 प्रसूताओं के परिजनों ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए थे. परिजनों का आरोप था की डॉक्टरों के द्वारा प्रसूताओं का गलत तारीके से इलाज किया गया. जिसके चलते उनकी याददाश्त चली गई. इस घटना में ब्लैकलिस्टेड इंजेक्शन लगाने से पांच प्रसूताओं की याददास्त जाने के मामले में स्टोर कीपर को निलंबित कर दिया गया है.
रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल में प्रसव पीड़ा से कराहती सात महिलाओं को एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया गया था. जिसे दो महीने पहले ही ‘अमानक’ घोषित कर ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था. प्रसूताओं की डिलेवरी ऑपरेशन से हुई। इसके बाद चार प्रसूताओं की याददाश्त चली गई थी. जिसमें से एक प्रसूता की हालत नाजुक बनी हुई थी. हालांकि इलाज के बाद अब सभी प्रसूताएं स्वास्थ्य हैं.
डॉक्टरों ने जताई थी इंजेक्शन के रिएक्शन की आशंका
गायनी विभाग की महिला गायनोलॉजिस्ट डॉ. बीनू सिंग ने बताया था कि जिन महिलाओं को 27 फरवरी की रात डिलीवरी के लिए भर्ती किया गया था. ऐसी 7 महिलाएं थी जिन्हें वोमिटिंग होने के साथ सिर ने दर्द होने की समस्या उत्पन्न हुई थी. इसके बाद डॉक्टर ने तत्काल उनका उपचार शुरू किया गया था. सातों गर्भवती महिलाओं का सिजेरियन पिछली रात हुआ था. प्रसूताओं को जो समस्या हुई थी उसका संबंध ऑपरेशन से नहीं है. प्राथमिक जांच में पता चला है की ऑपरेशन से पहले एनेस्थीसिया का जो इंजेक्शन दिया जाता है, हो सकता है की उस दवा का रिएक्शन हो या फिर दवाई का जो बैच हो उसमे मेन्यूफैक्चरिंग के दौरान कुछ डिफेक्ट रहा हो.
परिजन ने लगाया था आरोप
डभौरा निवासी विकास केशरवानी ने बताया “27 फरवरी की शाम को अपनी गर्भवती पत्नी को जीएमएच हॉस्पिटल में भर्ती कराया था. डॉक्टर ने कहा कि ऑपरेशन करना होगा. शुक्रवार की सुबह ऑपरेशन से डिलीवरी हुई. ऑपरेशन से हुई डिलीवरी के बाद उनकी पत्नी और नवजात बच्चा दोनों ही स्वास्थ्य थे. उसके बाद पता नहीं कौन सी दवा या इंजेक्शन दिया गया जिससे पत्नी की हालत अचानक से बिगड़ गई. उसके हाथ और पैर जकड़ गए. तब डॉक्टरों ने उसे आईसीयू वार्ड में भर्ती किया था.”‘