पलपल इंडिया प्रतिनिधि। शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के आरोपित एक पुलिस आरक्षक को 10 वर्ष की सजा और 10000 के जुर्माने से जिला सत्र न्यायालय के सत्र न्यायाधीश के एन सिंह के न्यायालय ने दंडित किया है। 29 अप्रैल को सुनाए गए फैसले में ज्ञानेन्द्र सिंह पुत्र महंत लाल सिंह स्थाई निवासी ग्राम पाटन गोरसी थाना जैतहरी जिला अनूपपुर को दोषी पाते हुए धारा 376 (2) (एन) भारतीय दण्ड संहिता के तहत दण्डित किया गया है।
दरअसल शिकायतकर्ता महिला अपने समन के संबंध में धनपुरी थाना गई तो वहां पर पदस्थ पुलिस आरक्षक ज्ञानेन्द्र सिंह से उसकी जान पहुंचान हो गई। उसने उसका नंबर ले लिया और बाद में दोंनो के बीच में बातचीत होने लगी। इसके बाद पुलिस आरक्षक ज्ञानेन्द्र सिंह द्वारा महिला से यह कहा गया कि वह अविवाहित है, उससे शादी करेगा। शादी का झांसा देकर अपने किराये के मकान बुढार में ले जाने लगा। उसके बाद कई स्थानों पर उसे ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया। महिला उससे बार-बार शादी के लिए कहा लेकिन वह बहाने बनाकर टालता रहा। शादी नहीं किया और उसके साथ मारपीट भी करने लगा। इसी बीच महिला गर्भवती हो गई और उसे एक पुत्र हुआ। वहीं इस दौरान आरक्षक की पहली पत्नी और उसके बच्चे जब किराये के मकान में रहने के लिए आए तब महिला को यह जानकारी हुई कि आरक्षक पूर्व से ही शादी-शुदा है और उसके बच्चे भी हैं।
परेशान होकर महिला ने इस मामले की रिपोर्ट थाने में किया। पुलिस ने आरोपित आरक्षक के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया। विवेचना के दौरान प्राप्त डीएनए रिपोर्ट से भी इस बात की पुष्टि हुई कि अभियुक्त शिकायतकर्ता के पुत्र का जैविक पिता है। इस तरह से मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने पुलिस आरक्षक को दोषी पाते हुए कठोर सजा सुनाई है।