नासिक. महाराष्ट्र के नासिक के बाद अब यवतमाल जिले के ग्रामीण इलाकों में भी जल संकट गहराने लगा है। अर्णी तहसील के कई गांवों में महिलाएं रोजाना 2 से 3 किलोमीटर की दूरी तय कर पानी लाने को मजबूर हैं। फिसलन भरे रास्तों और जोखिम भरी परिस्थितियों में यह संघर्ष उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
गांव की एक महिला पूजा ने बताया, “पानी लाने के लिए हमें ऐसे रास्तों से गुजरना पड़ता है जहाँ हर समय गिरने का डर रहता है, लेकिन मजबूरी है… पानी तो चाहिए ही।”
ग्रामीणों के मुताबिक सुबह और शाम दोनों वक्त पानी का इंतज़ाम करना सबसे बड़ी चिंता बन गया है। कई बार उन्हें रात के समय भी पानी के लिए भटकना पड़ता है। छोटे बच्चों वाले परिवारों की मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं। ऐसी ही स्थिति हाल ही में नासिक के टोंडवळ गांव में भी देखने को मिली थी, जहां एक महिला ने कहा था, “गांव में पानी नहीं है, बच्चों के लिए हमें दूर-दूर तक जाना पड़ता है।”
स्थानीय लोगों ने राज्य सरकार से जल संकट के समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल सुविधा का नहीं, बल्कि जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। एक ग्रामीण ने कहा, “जब पानी ही नहीं मिलेगा, तो जिंदगी कैसे चलेगी?”
राज्य में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण कई जिलों में जलाशयों का जलस्तर तेजी से घटता जा रहा है। विशेषज्ञों और प्रशासन का मानना है कि अगर जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो नासिक और यवतमाल समेत अन्य प्रभावित जिलों में स्थिति और बदतर हो सकती है।