नई दिल्ली. सूर्य धरती पर जीवन चक्र चलाए रखने के लिए अनिवार्य है, लेकिन यही सूर्य धरती के लिए विनाशकारी भी साबित हो सकता है, क्योंकि सूर्य आजकल भयानक तरीके से धधक रहा है। 11 साल में एक बार सूर्य उस चरम स्थिति पर पहुंचता है, जहां सूर्य की सतह पर सनस्पॉट्स बढ़ जाते हैं। इसके चलते सूर्य की सतह पर विस्फोट हो सकते हैं। भयंकर सौर तूफान, भू-चुंबकीय तूफान और सोलर फ्लेयर्स उठ सकते हैं। कोरोनल मास इजेक्शन्स (ष्टरूश्वह्य) होने लगते हैं। वैज्ञानिक सूर्य की इस स्थिति को सोलर मैक्सिमम कहते हैं। सूर्य पर रिसर्च करने के लिए लॉन्च किया गया हृ्रस््र का पार्कर सोलर प्रोब सूर्य पर नजर रखे हुए है। हृह्र्र्र का स्ङ्खस्नह्र-रु1 सैटेलाइट भी सोलर मैक्सिमम को ऑब्जर्व कर रहा है। नासा समेत दुनियाभर की स्पेस एजेंसियां सूर्य की स्थिति की निगरानी कर रही हैं, ताकि किसी भी तरह के खतरे का पहले से पता चल सके।
अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा और नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (हृह्र्र्र) के स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर (स्ङ्खक्कष्ट) ने अक्टूबर 2024 में सोलर मैक्सिमम शुरू होने की घोषणा की थी और बताया था कि सूर्य का यह चक्र एक साल तक जारी रहेगा। सोलर मैक्सिमम से अंतरिक्ष में एक्टिव स्पेस मिशन, फ्लाइट्स की आवाजाही, सैटेलाइट्स, स्पेस स्टेशन में लगे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस प्रभावित हो सकते हैं। सोलर मैक्सिमम न केवल अंतरिक्ष में बल्कि धरती पर इलेक्ट्रॉनिक और टेक्निकल सिस्टम को तबाह कर सकता है। पॉवर ग्रिड फेल होने से ब्लैक आउट हो सकता है।
नासा की रिपोर्ट के अनुसार, सोलर मैक्सिमम को लेकर वैज्ञानिक कहते हैं कि अगर सूर्य पर विस्फोट हुए या सौर तूफान आया तो धरती पर असर पड़ेगा। गंभीर परिणाम झेलने पड़ सकते हैं, लेकिन समय रहते तैयारी करके नुकसान होने की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। सोलर मैक्सिमम हर 11 साल में एक बार होता है तो इसकी तीव्रता और रिजल्ट्स को पहले ही भांप लिया गया है। धरतीवासियों के लिए घबराने वाली बात नहीं है, लेकिन सतर्कता और तैयारी अनिवार्य है, जिसमें स्पेस एजेंसियां जुटी हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, सोलर फ्लेयर्स अंतरिक्ष में लॉन्च सैटेलाइट्स और इसमें लगे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में कुछ सैटेलाइट्स डी-ऑर्बिट हो सकते हैं। सैटेलाइट्स सूर्य को सूर्य की ग्रैविटी से बाहर होना पड़ेगा। सोलर फ्लेयर्स से निकलने वाल एक्सरे और अल्ट्रा वॉयलेट किरणें नुकसानदायक होती हैं। इनसे धरती पर त्रक्कस्, रेडियो कम्यूनिकेशन, नेविगेशन सिस्टम, रडार ठप हो सकते है। पॉवर ग्रिड फेल होने ब्लैक आउट हो सकता है। ज्यादा ऊंचाई पर उडऩे वाली फ्लाइट्स डगमगा सकती हैं।