नई दिल्ली. भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने सीमावर्ती राज्यों में एक बड़ा सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह अभ्यास गुरुवार, 29 मई 2025 को शाम 4 बजे जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात जैसे पाकिस्तान से सटे राज्यों में किया जाएगा।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य- गृह मंत्रालय के निर्देश पर होने वाली इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों—जैसे युद्ध या आतंकी हमलों—के दौरान नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने की प्रक्रिया से अवगत कराना और प्रशासन की तैयारियों की वास्तविक जांच करना है। इस ड्रिल के माध्यम से नागरिकों को सुरक्षा उपायों और आपदा प्रतिक्रिया के तरीके सिखाए जाएंगे।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद बढ़ा अलर्ट- यह निर्णय हाल ही में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बायसरन घाटी में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद लिया गया है, जिसमें 26-28 पर्यटकों की मौत हो गई थी, जिनमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल था। लश्कर-ए-तैयबा और उसकी प्रॉक्सी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) द्वारा किए गए इस हमले ने भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में नई तल्खी ला दी है।
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया- हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कई सख्त कदम उठाए:
अटारी-वाघा बॉर्डर को बंद किया गया।
सिंधु जल समझौता निलंबित कर दिया गया।
पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करते हुए 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश जारी हुआ।
पाकिस्तानी उच्चायोग के स्टाफ को 55 से घटाकर 30 कर दिया गया और राजनयिकों को वापस बुला लिया गया।
आर्थिक और डिजिटल प्रतिबंध भी शामिल- 23 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCS) की बैठक हुई, जिसमें पाकिस्तान पर कई आर्थिक और डिजिटल प्रतिबंध लगाए गए:
सभी आयात-निर्यात और डाक सेवाएं रोक दी गईं।
पाकिस्तान के शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई।
IMF ने पाकिस्तान की GDP ग्रोथ रेट का अनुमान 3% से घटाकर 2.6% कर दिया।
भारत में पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल्स जैसे Dawn, Geo News और ARY News को ब्लॉक कर दिया गया।
जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन तेज- हमले के बाद सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा, उरी और बारामूला क्षेत्रों में आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इन अभियानों में दो आतंकी मारे गए और 15 संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की गई। यह मॉक ड्रिल न सिर्फ नागरिकों की तैयारी की एक झलक होगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि देश आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।