तेहरान. मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुँच चुका है। ईरान और इज़रायल के बीच लंबे समय से चल रहे छद्म युद्ध में अब अमेरिका ने सीधे हस्तक्षेप कर दिया है। अमेरिकी वायु सेना ने एक बड़े सैन्य अभियान में ईरान के तीन अहम परमाणु स्थलों को सफलतापूर्वक निशाना बनाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे अमेरिका की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन बताया और हमले के तुरंत बाद शांति की अपील भी की। इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र को व्यापक युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है।
राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी B-2 बॉम्बर्स ने ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित प्रमुख और सबसे सुरक्षित परमाणु ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। सबसे बड़ा हमला फोर्डो की भूमिगत यूरेनियम संवर्धन सुविधा पर किया गया। ट्रंप ने जानकारी दी कि सभी अमेरिकी विमान सफलतापूर्वक अपने मिशन को पूरा कर ईरानी हवाई क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकल आए हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब ईरान का परमाणु कार्यक्रम इज़रायल और पश्चिमी देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ था। इज़रायल लगातार यह चेतावनी देता रहा है कि वह किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा।
राष्ट्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अपने फैसले का बचाव किया और कहा कि इस हमले का उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमताओं को हमेशा के लिए समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि बीते 40 वर्षों से ईरान अमेरिका के खिलाफ काम कर रहा है और इस टकराव में कई अमेरिकी नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अब यह स्थिति और बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अपने संदेश में ट्रंप ने एक ओर जहां ईरान से शांति स्थापित करने की अपील की, वहीं दूसरी ओर कठोर चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यदि ईरान ने शांति का रास्ता नहीं चुना, तो भविष्य में इससे भी अधिक घातक हमलों का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने यह भी बताया कि इस मिशन में जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, वे अब तक के सबसे सुरक्षित और कठिन लक्ष्य माने जाते थे।