नई दिल्ली। दिल्ली की नई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कार्यभार संभालते ही प्रशासनिक सख्ती दिखाते हुए बड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्रियों के निजी स्टाफ की सेवाएं समाप्त करने का निर्देश जारी किया है। इसके साथ ही, पिछली सरकारों द्वारा विभिन्न विभागों और संस्थानों में प्रतिनियुक्त किए गए अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके मूल विभागों में वापस लौटने का आदेश दिया गया है।
पूर्व सरकार के कार्यकाल में कई अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर विभिन्न बोर्डों और निगमों में भेजा गया था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे अपने कर्मचारियों की मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट दें। इसके अलावा, जिन कर्मचारियों को अन्यत्र तैनात किया गया था, उन्हें तुरंत अपने मूल विभाग में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है।
सरकार ने एक सप्ताह पहले ही सभी विभागों से पूर्व सरकार द्वारा नियुक्त कॉन्ट्रैक्ट और व्यक्तिगत स्टाफ की सूची मांगी थी। उसी के आधार पर यह सख्त फैसला लिया गया है, जिसे प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद रेखा गुप्ता ने अपनी अध्यक्षता में पहली कैबिनेट बैठक आयोजित की। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनमें आयुष्मान योजना को मंजूरी देना प्रमुख रहा।
कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेखा गुप्ता ने बताया कि पिछली सरकार ने सीएजी (CAG) की 14 रिपोर्ट्स को विधानसभा में पेश नहीं किया था। उनकी सरकार विधानसभा की पहली बैठक में इन रिपोर्ट्स को सदन में प्रस्तुत करेगी। रेखा गुप्ता के इन कड़े फैसलों से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि उनकी सरकार प्रशासनिक सुधारों और पारदर्शिता पर जोर दे रही है। उनके इन शुरुआती कदमों ने दिल्ली सरकार में हलचल पैदा कर दी है।