नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत मजबूत आर्थिक बुनियाद, सशक्त वित्तीय प्रणाली और टिकाऊ विकास की प्रतिबद्धता के बल पर वित्त वर्ष 2026 में दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने रिजर्व बैंक की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के आधार पर बताया कि घरेलू बचत दर में वृद्धि से विकास के लिए पूंजी की उपलब्धता बनी रहेगी, और मांग के कारण महंगाई पर कोई विशेष दबाव नहीं दिख रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बाहरी और भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ विकास की गति को प्रभावित कर सकती हैं। वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में भारत की जीडीपी 7.4 प्रतिशत बढ़ी, जो मुख्य रूप से पूंजी निर्माण में 9.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि से प्रेरित रही। यह सुधार मुख्य क्षेत्रों में गतिविधियों के पुनरुद्धार और उच्च आवृत्ति संकेतकों (हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स) के मजबूत प्रदर्शन के कारण हुआ।
पूरे वित्त वर्ष 2025 में पूंजी निर्माण की कुल वृद्धि 7.1 प्रतिशत रही। चौथी तिमाही में अधिकांश सेक्टरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। औद्योगिक क्षेत्र में 6.5 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। निर्माण क्षेत्र ने 10.8 प्रतिशत और विनिर्माण क्षेत्र ने 4.8 प्रतिशत की दर से विस्तार किया। निजी खपत ने भी अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। पूरे वित्त वर्ष 2025 में निजी अंतिम उपभोग व्यय में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी अवधि में निर्यात में 6.3 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि आयात में 3.7 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह निर्यात वृद्धि अमेरिकी टैरिफ की अनिश्चितता के बावजूद हासिल की गई है।