Jabalpur News: जबलपुर में पकड़ी गई 8000 मांगुर मछली की खेप, पश्चिम बंगाल से लाये गयी खेप

By: PalPal India News
September 17, 2025

Jabalpur News: एमपी के जबलपुर में मत्स्य पालन विभाग ने प्रतिबंधित थाइलैंड मांगुर मछली पर कार्रवाई की है. विभाग ने मछली के लगभग 8000 बच्चे जब्त किए हैं. यह कार्रवाई मत्स्य पालन विभाग के सहायक संचालक राजा राज तिलक धुर्वे ने की है. इस आक्रामक प्रजाति की मछली को भारत सरकार ने जैव विविधता बॉयो डायवर्सिटी और स्थानीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र इको सिस्टम को होने वाले गंभीर नुकसान के कारण प्रतिबंधित किया है.

Jabalpur News
Jabalpur News

Jabalpur News :

बताया गया है कि इन मछलियों को किसी तालाब में डालने से पहले ही पकड़ लिया गया. जिससे स्थानीय जलीय जीवन को होने वाले संभावित नुकसान को टाला जा सका. थाइलैंड मांगुर मछली एक अत्यंत आक्रामक और मांसाहारी मछली है. यह अन्य मछलियों, यहां तक कि स्थानीय प्रजातियों को भी खा जाती है. जिससे जलीय जैव विविधता को गंभीर खतरा होता है. जहां भी मिले उसे तुरंत नष्ट कर देने के निर्देश है. एनजीटी ने थाइलैंड मांगुर मछली को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया है.

Jabalpur News :

सरकार का निर्देश है कि जहां भी इस तरह की प्रतिबंधित मछलियां पाई जाती हैं, उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाए. पकड़े गए मछली के बच्चों को गोकलपुर स्थित शासकीय परिक्षेत्र में ले जाकर गड्ढा खोदकर नष्ट कर दिया गया. यह सुनिश्चित किया जाता है कि ये आक्रामक प्रजातियां हमारे जल निकायों में प्रवेश न कर पाएं और हमारे स्थानीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखा जा सके.

Jabalpur News
Jabalpur News

इस मछली की तस्करी की वजह यह है कि यह किसी भी तरह के पानी में आसानी से जीवित रह सकती है. यहां तक कि बेहद प्रदूषित और गंदे पानी में भी तेजी से बढ़ती है. कम लागत और कम समय में अधिक ग्रोथ मिलने के कारण इसका पालन एक बहुत ही आकर्षक व्यवसाय बन जाता है.

मागुर (Magur) एक प्रकार की मीठे पानी की मछली है, जिसे अंग्रेज़ी में वाल्किंग कैटफ़िश (Walking Catfish) भी कहा जाता है। यह शरीर में लंबे होते हैं, और इनका रंग धूसर या धूसर-भूरा होता है, जिस पर छोटे-छोटे सफेद धब्बे भी हो सकते हैं। ये त्वचा शल्क रहित होती है, लेकिन बलगम की परत से ढकी रहती है, और इनमें संवेदी बारबेल के कई जोड़े होते हैं। 

मुख्य विशेषताएँ:

शारीरिक बनावट: 
शरीर लंबा होता है, और इसमें लंबे पृष्ठीय और गुदा पंख होते हैं। 

त्वचा: 
शल्क रहित होती है और बलगम से ढकी होती है, जो पानी के बाहर सुरक्षा प्रदान करती है। 

आहार: 
इसे एक पोष्टिक भोजन माना जाता है, खासकर शारीरिक कमजोरी के दौरान। 

अन्य नाम: 
भारत में अलग-अलग क्षेत्रों में इसके कई नाम हैं, जैसे कर्नाटक में मुर्गोडु (Murgodu) या मुगुडु (Mugudu)। 
Jabalpur News
Jabalpur News

भोजन और उपयोग: 

विशेष रूप से बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में इसे मगुर करी (Magur करी) के रूप में खाया जाता है।

इसे शारीरिक शक्ति बढ़ाने के लिए बच्चों को खिलाने की सलाह दी जाती है।

कहा जाता है कि यह बीमारी के बाद शरीर को ठीक करने में मदद करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *