नई दिल्ली. भारत को नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने सुप्रीम कोर्ट के 52वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद उन्होंने अपनी मां कमलताई गवई के चरण छूकर आशीर्वाद लिया। यह भावुक क्षण पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।
जस्टिस गवई देश के पहले बौद्ध और स्वतंत्रता के बाद दलित समुदाय से आने वाले दूसरे मुख्य न्यायाधीश बने हैं। इससे पहले इस समुदाय से केवल जस्टिस के. जी. बालकृष्णन को यह पद मिला था। उनका कार्यकाल लगभग छह महीनों का रहेगा।
महत्वपूर्ण फैसलों में निभाई भूमिका
संघर्षों से सफलता तक का सफर- जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले में हुआ था। उन्होंने 16 मार्च 1985 से वकालत की शुरुआत की। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने वरिष्ठ वकील और बाद में जज बने एस. भोसले के साथ काम किया।
1987 से 1990 के बीच उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में स्वतंत्र रूप से वकालत की। इसके बाद नागपुर खंडपीठ में उन्होंने संवैधानिक और प्रशासनिक मामलों में विशेषज्ञता हासिल की। वे नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम, अमरावती विश्वविद्यालय समेत कई संस्थाओं के वकील रहे।
समाज के लिए एक प्रेरणा- जस्टिस गवई का सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद तक पहुंचना न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उस समाज के लिए भी प्रेरणादायक है जिसे लंबे समय तक मुख्यधारा से दूर रखा गया। शपथ लेने के बाद मां के चरणों में झुककर उन्होंने यह संदेश दिया कि ऊंचे पद पर पहुंचने के बावजूद अपनी जड़ों से जुड़े रहना कितनी बड़ी बात है।