बेंगलुरु। कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य में संचालित रैपिडो, ओला और उबर जैसी बाइक टैक्सी सेवाओं को छह हफ्तों के भीतर बंद करने का आदेश दिया है। यह फैसला जस्टिस बी. श्याम प्रसाद की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनाया, जिसमें बाइक टैक्सी एग्रीगेटरों की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।
रैपिडो और अन्य कंपनियों ने कोर्ट में याचिका दायर कर बाइक टैक्सी सेवाओं को कानूनी मान्यता देने और ICE (Internal Combustion Engine) वाहनों को परिवहन वाहन के रूप में पंजीकृत करने की अनुमति मांगी थी। याचिकाकर्ताओं ने यह भी अनुरोध किया कि सरकार बाइक टैक्सी सेवाओं के लिए एक स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार करे, जिससे इनका संचालन बाधित न हो।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह राज्य सरकार को कोई नया नियम बनाने का निर्देश नहीं दे सकता और न ही गैर-परिवहन वाहनों को परिवहन वाहन के रूप में पंजीकृत करने का आदेश दे सकता है।
2022 में जस्टिस ज्योति मिलिमनी की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने बाइक टैक्सी सेवाओं को अंतरिम राहत दी थी, जिसके चलते ये कंपनियां अब तक संचालन जारी रख पा रही थीं। लेकिन अब हाई कोर्ट ने उस राहत को खत्म करते हुए छह हफ्तों में सभी बाइक टैक्सी सेवाओं को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद बेंगलुरु में हजारों बाइक टैक्सी राइडर्स प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि इन सेवाओं का इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग रोज़ाना करते हैं। वहीं, कंपनियों को भी अपने व्यवसाय मॉडल पर दोबारा विचार करना होगा। सरकार की ओर से अब तक इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन संभावना है कि कंपनियां सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर सकती हैं।