सस्ते होंगे लोन! तीसरी बार भी कम हो सकती है रेपो रेट, ब्याज दरों में फिर राहत की उम्मीद

By: PalPal India News
June 2, 2025

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (क्रक्चढ्ढ) द्वारा लगातार तीसरी बार ब्याज दरों में कटौती होने जा रही है, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। अनुमान है कि खुदरा महंगाई तीन महीने से 4त्न के औसत लक्ष्य से नीचे बनी हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि रेपो रेट में फिर से 0.25त्न की कटौती की जा सकती है। ऐसा होने से ब्याज दरों में इस साल अब तक .75त्न की कटौती होगी। मौद्रिक नीति समिति आगामी 4 जून को अगली द्विमासिक मौद्रिक नीति पर विचार-विमर्श शुरू करेगी, वहीं 6 जून को फैसले की घोषणा की जाएगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, धीमी वृद्धि और नियंत्रित मुद्रास्फीति ने मौद्रिक नीति में और ढील की गुंजाइश छोड़ी है। भारत की जीडीपी वृद्धि पिछले वर्ष के 9.2त्न से वित्त वर्ष 25 में 6.5त्न तक धीमी हो गई, हालांकि मार्च तिमाही में उम्मीद से बेहतर 7.4त्न की वृद्धि देखी गई। इस बीच, मुद्रास्फीति आरबीआई के 4त्न लक्ष्य के भीतर बनी हुई है। अप्रैल में, क्रक्चढ्ढ ने अपनी रेपो दर – जिस दर पर वह बैंकों को उधार देता है – को 25 आधार अंकों (100 आधार अंकों = 1 प्रतिशत अंक) से घटाकर 6त्न कर दिया।
इससे पहले क्रक्चढ्ढ फरवरी और अप्रैल में दो बार प्रमुख ब्याज दर (रेपो रेट) में 0.50त्न की कटौती कर चुका है, जिससे यह 6त्न पर आ गई है। ढ्ढष्टढ्ढष्टढ्ढ सिक्योरिटीज के ्र.प्रसन्ना भी 25 बीपीएस कटौती की उम्मीद करते हैं, उनका कहना है कि जनवरी-मार्च की मजबूत जीडीपी वृद्धि मध्यम ढील के मामले की पुष्टि करती है। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने प्रचुर मात्रा में तरलता सुनिश्चित करके पहले ही वित्तीय स्थितियों को आसान बना दिया है। आरबीआई ने रुपये की तरलता को पंप करके और बैंकों से अधिशेष निधियों को अवशोषित करने के लिए मुद्रा बाजार से सामान्य उधारी से बचकर ऐसा किया है।

वहीं रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के 4त्न तक रहने के अनुमान के साथ, रूक्कष्ट द्वारा मौद्रिक ढील जारी रहने की संभावना है। अगले हफ्ते 0.25त्न की दर में कटौती की उम्मीद जताई जा रही है।यहां हम आपको बता दें कि क्रक्चढ्ढ गवर्नर संजय मल्होत्रा ??की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय रूक्कष्ट ने भी अपनी अप्रैल की नीति में रुख को ‘तटस्थÓ से बदलकर ‘उदारÓ करने का निर्णयलिया था, जिसके बाद भी कटौती की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

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