संभल। बॉलीवुड से अध्यात्म की ओर कदम बढ़ाने वाली ममता कुलकर्णी ने रविवार को श्रीकल्किधाम पहुंचकर शिलादान किया और इस अवसर को अपने जीवन का सबसे पुण्यकारी क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य उन्हें पूर्व जन्मों के सत्कर्मों के कारण प्राप्त हुआ है। ममता ने भावविभोर होकर कहा कि समाधि साधना के दौरान उन्हें स्वयं भगवान श्रीकल्कि के दर्शन हुए। उन्होंने बताया कि वे ऋषि जमदग्नि के गोत्र से हैं, जिसमें भगवान परशुराम ने भी अवतार लिया था। उनके अनुसार, घोर कलियुग अभी नहीं आया है, बल्कि आने वाला है। जिस दिन धरती से धर्म पूरी तरह लुप्त हो जाएगा, उसी दिन घोरतम कलियुग का वास्तविक आरंभ होगा।
कल्किधाम पहुंचते ही श्रद्धालुओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह धाम उन्हें गहरी आत्मिक शांति प्रदान करता है और अब वह जीवन भर इस पावन स्थान से जुड़ी रहेंगी। उनका संकल्प है कि वे कल्कि धर्म की साधना को आगे बढ़ाएंगी और सनातन धर्म की पुनर्स्थापना में अपना पूर्ण योगदान देंगी। ममता कुलकर्णी ने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्तमान समय दैविक और आसुरी शक्तियों के संघर्ष का काल है। अंततः जीत धर्म की होगी और सनातन धर्म का पुनरुद्धार सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि चाहे कोई किसी भी धर्म को मानता हो, प्रार्थना अंततः एक ही परमात्मा तक जाती है। उनका मानना है कि कल्किधाम की ऊर्जा अत्यंत दिव्य है और यह हर साधक की आत्मा को शुद्ध करती है।
कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने कहा कि ममता कुलकर्णी ने महाकुंभ में अपनी फिल्मी पहचान का त्याग कर सनातन धर्म की सेवा को जीवन का ध्येय बना लिया। उन्होंने संन्यास लेकर महामंडलेश्वर साध्वी ममता अनंत गिरी के रूप में नया अध्यात्मिक जीवन स्वीकार किया है। अब वे पूरी तरह से कल्कि धाम और सनातन धर्म के कार्यों के लिए समर्पित हैं।