नई दिल्ली. मार्क कार्नी ने शुक्रवार को कनाडा के 24वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की, जिससे देश की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हुआ। उन्होंने जस्टिन ट्रूडो की जगह ली, जिन्होंने जनवरी में अपने पद से इस्तीफा दिया था। पूर्व केंद्रीय बैंकर कार्नी ने बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर के रूप में सेवाएं दी हैं और वैश्विक आर्थिक संकट एवं ब्रेक्सिट जैसी चुनौतियों को सफलतापूर्वक संभाला है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कार्नी का मंत्रिमंडल ट्रूडो की सरकार की तुलना में छोटा हो सकता है। संभावना जताई जा रही है कि इसमें 15 से 20 मंत्री होंगे, जबकि ट्रूडो के मंत्रिमंडल में 37 मंत्री शामिल थे।
प्रधानमंत्री पद संभालते ही कार्नी के सामने अमेरिका के साथ बिगड़ते संबंधों की बड़ी चुनौती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयातित स्टील और एल्युमिनियम पर 25% शुल्क लगाया है और अन्य उत्पादों पर भी भारी शुल्क लगाने की धमकी दी है। इसके अलावा, ट्रंप द्वारा कनाडा को अमेरिका में मिलाने संबंधी बयान देने से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
इन परिस्थितियों में, कार्नी का प्रमुख लक्ष्य अमेरिका के साथ संबंध सुधारना और कनाडा की संप्रभुता को मजबूत बनाए रखना होगा। उनकी आर्थिक विशेषज्ञता और संकट प्रबंधन क्षमता के आधार पर उम्मीद की जा रही है कि वे इन चुनौतियों का समाधान निकालकर देश को स्थिरता प्रदान करेंगे।