पिथौरागढ़। कैलाश-मानसरोवर यात्रा का लंबे समय से इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है। इस साल भारत-चीन के बीच सहमति बनने के बाद यात्रा फिर से शुरू होने जा रही है। खास बात यह है कि पहली बार श्रद्धालुओं को पैदल यात्रा नहीं करनी होगी, जिससे यात्रा आसान और सुविधाजनक बन जाएगी।
चीन के साथ संबंधों में सुधार के चलते 2019 से बंद मानसरोवर यात्रा अब दोबारा शुरू होने जा रही है। इस बार यात्रा के कई पहलू बदले गए हैं, जिससे यह पहले से अधिक सुगम होगी।
पहले कैलाश-मानसरोवर यात्रा को दुनिया की सबसे दुर्गम पैदल यात्राओं में से एक माना जाता था। लेकिन पहली बार श्रद्धालुओं को एक भी कदम पैदल नहीं चलना पड़ेगा। लिपुलेख बॉर्डर तक सड़क पूरी तरह तैयार हो चुकी है, जिससे अब पूरा सफर वाहनों के माध्यम से तय किया जाएगा। केंद्रीय राज्य मंत्री सड़क एवं परिवहन अजय टम्टा ने बताया कि तवाघाट से लिपुलेख बॉर्डर तक सड़क निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जिससे इस बॉर्डर तक गाड़ी से पहुंचना अब आसान हो गया है।
दिल्ली से टनकपुर होते हुए लिपुलेख तक यात्रा
पहले 24 दिन में पूरी होने वाली मानसरोवर यात्रा अब सिर्फ 10 दिनों में पूरी होगी। इस बार यात्रा परंपरागत रूट यानी टनकपुर से पिथौरागढ़ होते हुए संचालित की जाएगी। पहले जहां यात्रियों को पैदल 8 पड़ाव पार करने होते थे, वहीं इस बार उन्हें केवल गुंजी में दो दिन रुकना होगा।
यात्रा का रूट इस प्रकार होगा:
यात्रा होगी अधिक महंगी
पिथौरागढ़ के जिला पर्यटन अधिकारी कीर्ती आर्या ने बताया कि यात्रा को लेकर दिल्ली में एक बैठक हो चुकी है और पर्यटन विभाग पूरी तैयारी कर चुका है। सरकार की अनुमति मिलते ही यात्रा शुरू कर दी जाएगी। हालांकि, इस बार यात्रा के महंगी होने की संभावना है। 2019 तक एक यात्री को करीब ढाई लाख रुपये खर्च करने पड़ते थे, लेकिन इस बार खर्च और अधिक बढ़ सकता है।