पणजी. गोवा में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के संचालन के लिए तैयार किए जा रहे नए दिशानिर्देशों में ओला और उबर जैसी बड़ी कैब कंपनियों को शामिल नहीं किया जाएगा। इस बात की पुष्टि खुद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने शुक्रवार को की। इसका मतलब साफ है कि गोवा में ओला-उबर की एंट्री पर अब सरकार की ओर से बैन लगा दिया जाएगा।
पर्यटन पर क्या पड़ेगा असर?
सरकार के इस फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि इससे गोवा के पर्यटन उद्योग को नुकसान हो सकता है। टैक्सी सेवाएं सीमित होने से पर्यटकों को यात्रा में असुविधा हो सकती है, जिससे गोवा की लोकप्रियता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। दूसरी ओर, कई स्थानीय टैक्सी ऑपरेटरों ने इस कदम का स्वागत किया है।
स्थानीय टैक्सी संचालकों की चिंता
भाजपा विधायक माइकल लोबो और जीत अरोलकर ने टैक्सी चालकों के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात कर 20 मई को जारी ‘गोवा ट्रांसपोर्ट एग्रीगेटर्स गाइडलाइन्स 2025’ को लेकर अपने सुझाव और आपत्तियां रखीं। इस मसौदा नीति पर सुझाव देने की अंतिम तिथि 30 जून तय की गई है।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बैठक के बाद मीडिया से कहा, “टैक्सी चालकों को किसी तरह की गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। वे सोच रहे हैं कि इन दिशानिर्देशों के जरिये ओला-उबर जैसी बाहरी कंपनियों के लिए रास्ते खुल जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं होगा। इन नियमों का मकसद ऐसी कंपनियों के प्रवेश का रास्ता खोलना नहीं है।”
मुख्यमंत्री के बयान से साफ हो गया है कि गोवा सरकार अपने स्थानीय टैक्सी ऑपरेटरों के हितों को प्राथमिकता दे रही है और फिलहाल ओला-उबर जैसी बड़ी कैब कंपनियों को गोवा में अनुमति नहीं देने जा रही है।