राम नवमी पर PM मोदी देंगे देश को बड़ी सौगात, रामेश्वरम में बने पंबन ब्रिज का करेंगे उद्घाटन ,जाने इस पुल की ख़ास बातें

By: PalPal India News
March 26, 2025

पलपल इंडिया प्रतिनिधि। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम नवमी पर रामेश्वरम में बने पंबन ब्रिज का लोकार्पण करने वाले हैं. यह पुल‍ उसी जगह पर बना है, जहां भगवान राम ने रामसेतु बनवाया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भगवान राम से जुड़े तीर्थों को नया स्‍वरूप देने में जुटे हैं. इसी कड़ी में पीएम मोदी अयोध्‍या के बाद तमिलनाडु में उस जगह से देशवास‍ियों को एक खूबसूरत ब्रिज की सौगात देने जा रहे हैं, जहां कभी प्रभुराम के चरण पड़े थे. जी हां, रामेश्वरम का पंबन ब्रिज, यह ब्रिज ज‍िस समुद्री क्षेत्र (मन्नार की खाड़ी) के ऊपर बना है, वह वही स्थान माना जाता है जहां से भगवान राम ने लंका जाने के लिए रामसेतु  का निर्माण करवाया था. रामनवमी के द‍िन पीएम मोदी यह ब्रिज देशवास‍ियों को समर्पित करेंगे. इसका लुक देखकर आप भी मोह‍ित हो जाएंगे.

पंबन ब्रिज समुद्र पर बना हुआ है और यह रामेश्वरम को भारत की मुख्‍य भूमि (मंडपम) से जोड़ेगा. वैज्ञानिक अध्ययनों और नासा की तस्वीरों से साफ हो चुका है क‍ि पंबन के पास ही समुद्र में एक प्राचीन चट्टानी श्रृंखला पाई गई है, जो रामसेतु की तरह नजर आती है. माना जाता है क‍ि यह सेतु पंबन से श्रीलंका तक फैला हुआ था. यही वजह है क‍ि सरकार ने इस जगह पर जो पुल बनाया है, उसका नाम पंबन ब्रिज रखा गया है.

113 साल पहले हुई शुरुआत
सबसे पहले पंबन ब्रिज का निर्माण 1911 में शुरू हुआ और 1914 में इसे यातायात के लिए खोल दिया गया. यह भारत का पहला समुद्री पुल था. यह पुल मन्नार की खाड़ी के ऊपर बना हुआ है और रामेश्वरम द्वीप को तमिलनाडु के मंडपम से जोड़ता है.1954 में एक बड़ा हादसा हुआ, जब तूफान के कारण एक ट्रेन पुल से नीचे समुद्र में गिर गई. इसमें कई पैसेंजर्स की मौत हो गई थी. 1964 में आए चक्रवात ने ब्रिज को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया. 2019 में इंडियन रेलवे ने इसकी डिजाइन में बड़े बदलाव क‍िए.

पंबन ब्रिज की खास‍ियत भी जान लीजिए

  • पंबन ब्रिज न केवल एक इंजीनियरिंग चमत्कार है, बल्कि यह कई कहानियों और संघर्षों का साक्षी भी रहा है. पंबन ब्रिज एक कैंटिलीवर ब्रिज है, जो समुद्र तल से 12.5 मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है.
  • इस पुल का डिजाइन इतना अनूठा है कि यह बीच से खुल सकता है, जिससे समुद्री जहाज आसानी से गुजर सकते हैं. इसे “डबल-लीफ बेसक्यूल ब्रिज कहा जाता है.
  • इन पत्तों को मैन्युअल रूप से लीवर की मदद से उठाया और नीचे किया जाता था. प्रत्येक पत्ते का वजन लगभग 415 टन है. पुल में 143 खंभे लगे हैं, जो चक्रवात के वक्‍त भी इसे मजबूती से खड़ा रखेंगे.

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