नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की कड़ी जवाबी कार्रवाई से घबराए पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से भारत के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए एक आपात बैठक बुलाने का अनुरोध किया। सोमवार देर रात सुरक्षा परिषद में इस पर बंद कमरे में चर्चा हुई। हालांकि यह बैठक पाकिस्तान के लिए निराशाजनक रही, क्योंकि सुरक्षा परिषद के 15 में से 13 सदस्य देशों ने भारत का समर्थन किया। केवल पाकिस्तान और चीन ही ऐसे देश थे जो भारत विरोधी रुख पर कायम रहे।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस घिनौने अपराध के दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि सैन्य समाधान से हालात और बिगड़ सकते हैं।
UNSC में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार ने भारत पर ‘एकतरफा सैन्य कार्रवाई’ का आरोप लगाया और कहा कि इससे क्षेत्रीय शांति खतरे में है। उन्होंने कश्मीर को दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद बताया और कहा कि इसका समाधान किए बिना स्थायी शांति संभव नहीं।
पाकिस्तान का यह प्रयास महज औपचारिकता साबित हुआ। भारत को अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस जैसे स्थायी सदस्यों के साथ-साथ अधिकांश अस्थायी सदस्यों का भी समर्थन मिला। यह विदेश मंत्री एस. जयशंकर की सक्रिय और प्रभावशाली कूटनीति का परिणाम है। आतंकी हमले के तुरंत बाद उन्होंने विश्व के कई नेताओं से संपर्क कर भारत की स्थिति स्पष्ट की और सीमापार आतंकवाद की असलियत उजागर की।
भारत की सख्ती और अंतरराष्ट्रीय स्थिति- गौरतलब है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोग, जिनमें एक विदेशी नागरिक भी शामिल था, मारे गए थे। इसके बाद भारत ने सीमा पार से होने वाली आतंकी घुसपैठ के खिलाफ सख्त जवाबी कार्रवाई की। भारत की यह प्रतिक्रिया जहां आतंकी गतिविधियों के खिलाफ उसके कड़े रुख को दर्शाती है, वहीं पाकिस्तान को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर झटका लगा है।