शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का कहना है कि…. चारों शंकराचार्य श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में नहीं जा रहे, कोई द्वेष नहीं है, हमारा धर्म है कि शास्त्र विधि का पालन करें और करवाएं, वहां इसका पालन नहीं हो रहा, मंदिर का निर्माण अधूरा है!
खबर है कि…. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा है कि यदि अयोध्या का श्रीराम मंदिर रामानंद संप्रदाय का है तो मंदिर संप्रदाय को सौंप देना चाहिए, इसमें पूरे संत समाज को कोई आपत्ति नहीं होगी!अगर चंपत राय यह कहते हैं, कि मंदिर रामानंदी संप्रदाय का है, उसमें शैव, शाक्त और संन्यासियों का कोई काम नहीं; तो फिर ये संघी, भाजपाई और रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स मंदिर ट्रस्ट में क्या कर रहे हैं. ट्रस्ट का संचालन रामानंदी साधुओं को क्यों नहीं सौंपते? काहे भारी भरकम चंदे के ऊपर घात लगाकर बैठे हैं?
और प्रधानमंत्री जिस तरह से बार-बार केदारनाथ, काशी विश्वनाथ, पशुपतिनाथ आदि मंदिर में जाते हैं, उससे तो प्रतीत होता है कि वे शैव मत को मानने वाले हैं. उन्हें क्यों आमंत्रित किया गया है?
यह शंकराचार्यों का ही नहीं, सारे गैरसंघी हिन्दुओं का अपमान है, चाहे वे शैव हों, शाक्त हों, वैष्णव हों, या स्मार्त हों.
वैसे ये संघी अपनी असलियत दिखा ही देते हैं. अब हिंदुओं को मत सम्प्रदाय में भी बांटने लगे….