वॉशिंगटन. अमेरिका के मैसाचुसेट्स में एक संघीय जज ने शुक्रवार को ट्रंप प्रशासन के उस फैसले पर अस्थायी रोक लगा दी, जिसमें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए शिक्षा के दरवाजे बंद करने की बात कही गई थी। यह निर्णय उस वक्त आया जब अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने हार्वर्ड की स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफॉर्मेशन सिस्टम (SEVIS) तक पहुंच समाप्त कर दी थी।
DHS के निर्देश के मुताबिक, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के विदेशी छात्रों को या तो किसी अन्य शिक्षण संस्थान में स्थानांतरित होना पड़ता या फिर उन्हें अमेरिका छोड़ना होता, क्योंकि उनका वीजा स्टेटस रद्द कर दिया जाता। इस आदेश से विश्वविद्यालय में पढ़ रहे सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया था। अनुमान है कि हार्वर्ड में लगभग 780 भारतीय छात्र और शोधार्थी अध्ययनरत हैं।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने इस फैसले के खिलाफ शुक्रवार सुबह अदालत में याचिका दायर करते हुए कहा, “सरकार के एक आदेश ने हार्वर्ड के एक-चौथाई से अधिक छात्रों — विदेशी छात्रों — को बाहर करने की कोशिश की है। ये छात्र न सिर्फ शैक्षणिक दृष्टि से, बल्कि विश्वविद्यालय के मिशन में भी अहम भूमिका निभाते हैं। अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बिना हार्वर्ड, हार्वर्ड नहीं रह जाएगा।”
अदालत का यह फैसला न केवल हार्वर्ड के लिए, बल्कि अमेरिका में शिक्षा ग्रहण कर रहे लाखों विदेशी छात्रों के लिए राहतभरी खबर है।