नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े सार्वजनिक बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के एक ऋण खाते को ‘धोखाधड़ी’ घोषित करने का निर्णय लिया है। यह मामला अगस्त 2016 से जुड़ा हुआ है। रिलायंस कम्युनिकेशंस ने इस संबंध में जानकारी शेयर बाजार को दी है, जो सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) के नियामकीय दिशानिर्देशों के तहत अनिवार्य है।
कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को दी गई फाइलिंग में बताया, “हमें 30 जून 2025 को एसबीआई का एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें बैंक ने कंपनी के ऋण खाते को ‘धोखाधड़ी’ घोषित करने का निर्णय लेने की जानकारी दी है। साथ ही, कंपनी के पूर्व निदेशक अनिल धीरूभाई अंबानी का नाम भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भेजने का फैसला किया गया है, जैसा कि आरबीआई के वर्तमान दिशा-निर्देशों में प्रावधान है।”
रिलायंस कम्युनिकेशंस, अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप का हिस्सा है और वर्तमान में यह कंपनी दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (IBC), 2016 के तहत कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही है।
कंपनी ने अपनी फाइलिंग में आगे बताया कि लेनदारों की समिति (CoC) ने एक समाधान योजना को स्वीकृति दी है, जो अब राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT), मुंबई पीठ की मंजूरी का इंतजार कर रही है।
एसबीआई द्वारा भेजे गए पत्र की तारीख 23 जून 2025 बताई गई है, जबकि कंपनी को यह पत्र 30 जून को प्राप्त हुआ। पत्र में जिन ऋण और क्रेडिट सुविधाओं का उल्लेख किया गया है, वे उस अवधि से संबंधित हैं जब कंपनी दिवालिया घोषित नहीं हुई थी। कंपनी का कहना है कि नियमानुसार, इन मामलों का समाधान प्रस्ताव के माध्यम से या परिसमापन प्रक्रिया में किया जाना चाहिए।
एसबीआई ने इससे पहले दिसंबर 2023, मार्च 2024 और सितंबर 2024 में रिलायंस कम्युनिकेशंस को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। बैंक का आरोप है कि कंपनी इन नोटिसों का संतोषजनक जवाब देने में विफल रही है और ऋण शर्तों के उल्लंघन पर संतोषजनक सफाई नहीं दे सकी।