Street dogs: शहर में 50 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते, निगम की तरफ से नहीं हो रही ठोस कार्यवाई

By: PalPal India News
September 13, 2025

Street dogs:  आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में बीते दिनों पाटन में छह वर्षीय मासूम पर आवारा कुत्तों के हमले की घटना ने शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है. इस मामले के बाद एक बार फिर से नगर निगम की कार्यप्रणाली और आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर सवाल उठने लगे हैं. वर्तमान में शहर में लगभग 50 हजार आवारा कुत्ते मौजूद हैं. चिंताजनक बात यह है कि हर आठ महीने में इनकी संख्या और बढ़ जाती है, जबकि निगम सिर्फ लगभग 10 प्रतिशत कुत्तों का ही बधियाकरण कर पा रहा है.

Street dogs: आवारा कुत्तों की नसबंदी जरुरी

नगर निगम के कठौंदा स्थित डॉग हाउस में फिलहाल प्रतिदिन औसतन 15 कुत्तों की नसबंदी की ही क्षमता है. यही कारण है कि तेज़ी से बढ़ रही आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है. शहर के बाजार, चौराहे, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और मुख्य मार्गों पर इन कुत्तों का झुंड अक्सर देखने को मिलता है, जिससे आम नागरिकों में दहशत का माहौल है.

Street dogs
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निगम ने डॉग हाउस की क्षमता बढ़ाने के प्रयास शुरू किए हैं. जानकारी के अनुसार, यहां बधियाकरण पिंजरों की संख्या 56 से बढ़ाकर 100 की जा रही है. इस काम को पूरा होने में करीब डेढ़ माह का समय लगने का अनुमान है. इसके बाद भी यहां प्रतिदिन केवल 50 से 60 कुत्तों का ही बधियाकरण संभव हो सकेगा, जो मौजूदा संख्या की तुलना में बेहद कम है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर आवारा कुत्तों की बेतहाशा बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाना है, तो नगर निगम को अपनी मौजूदा रणनीति में बदलाव करना होगा. साथ ही, बधियाकरण की गति को कई गुना बढ़ाना होगा. फिलहाल, आम लोगों में यह बहस तेज़ हो गई है कि निगम की लापरवाही कहीं और बड़ी घटनाओं को जन्म न दे दे.

6 साल की मासूम कविता पर Street dogs का हमला

गुरुवार सुबह जबलपुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर पाटन क्षेत्र में एक हृदयविदारक घटना सामने आई। यहां 6 साल की मासूम कविता पर स्ट्रीट डॉग्स ने झुंड बनाकर हमला कर दिया। घटना सुबह करीब 7 बजे की है, जब बच्ची पास की दुकान से साबुन लेने गई थी और घर लौटते समय अचानक कुत्तों ने उसे घेर लिया।

Street dogs
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2 से 3 मिनट तक Street dogs ने नोचा

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बच्ची को स्ट्रीट डॉग्स ने करीब 2 से 3 मिनट तक नोंचते और काटते रहे। मासूम दर्द से तड़पती रही और चीखती रही, लेकिन आसपास से कोई मदद के लिए तुरंत नहीं पहुंच सका। कुछ देर बाद वहां से गुजर रहे राहगीरों ने बच्ची को खून से लथपथ हालत में देखा। उन्होंने पत्थर फेंककर कुत्तों को किसी तरह भगाया। इसके बावजूद, एक कुत्ता बच्ची का पीछा करता हुआ घर तक पहुंच गया।

घटना की जानकारी मिलते ही बच्ची की मां अहिल्याबाई मौके पर पहुंचीं। मकान मालिक धनीराम की मदद से मासूम को पहले पाटन स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची की हालत नाजुक देख उसे तुरंत जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची के सिर, हाथ, पैर और कंधे पर गहरे घाव हैं। सिर पर चोटें बेहद गंभीर हैं। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची को इलाज के लिए बेहोश करना जरूरी है, लेकिन पाटन स्वास्थ्य केंद्र में ऐसी सुविधा उपलब्ध न होने के कारण उसे जबलपुर भेजा गया।

Street dogs
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Street dogs: भारत में होती है सबसे ज्यादा घटना

दुनिया में आवारा कुत्तों के हमलों की सबसे ज्यादा घटनाएं भारत में होती है दुनिया में रेबीज से होने वाली मौतों में से 36% मौतें भारत में होती हैं । भारत में आवारा कुत्ते छोटे बच्चों को नोच-नोच कर मार डालते हैं। दुनिया में आवारा कुत्तों की संख्या भी भारत में सबसे ज्यादा है और साथ ही रेबीज से होने वाली मौतों के मामले भी सबसे ज्यादा यहीं हैं। रेबीज से होने वाली ज्यादातर मौतें दर्ज नहीं की जाती हैं।

पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2001 के अनुसार आवारा कुत्तों को मारा नहीं जा सकता, सिर्फ उनकी नसबंदी की जा सकती है। नगर पालिकाओं के पास आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए पैसे की कमी है। ज्यादातर भारतीयों का मानना ​​है कि उनके इलाके में आवारा कुत्तों के हमले आम बात है और नगरपालिका कुत्तों के काटने की घटनाओं को कम करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाती है। 2001 में आवारा कुत्तों को बचाने के लिए बनाए गए कानून के कारण आवारा कुत्तों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि यह कानून किसी भी आवारा कुत्ते को मारने पर रोक लगाता है।

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