श्रमदान से निखरा पनागर की ऐतिहासिक बावड़ी का स्वरुप

By: PalPal India News
June 30, 2025

जबलपुर।  प्राचीन काल में राजा महाराजा वर्षा जल के संचयन के लिये जगह-जगह बावड़ियों का निर्माण किया करते थे। जबलपुर जिले में ऐसी कई बावड़ियां आज भी विद्यमान हैं जिनका निर्माण गोंड राजाओं द्वारा जल प्रबंधन की दृष्टि से किया गया था। इन बावड़ियों में संग्रहित वर्षा जल का उपयोग पेयजल, सिंचाई और अन्य उद्देश्यों के लिये किया जाता था। जल संचयन और जल सरंक्षण के लिये बनाई गई ये बावड़ियां वास्तुकला का भी उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की पहल पर जल स्त्रोतों के सरंक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ प्राचीन और ऐतिहासिक जल सरंचनाओं को पुनर्जीवन देने चलाये गये जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जबलपुर की ऐसी कई बावड़ियों का पुराना वैभव वापस दिलाने में कामयाबी मिली है जो समय के साथ उपेक्षा का शिकार हो गई थीं तथा उनका इतिहास केवल किताबों तक सिमट कर रह गया था।

इन्हीं में से एक पनागर के जयप्रकाश वार्ड की हनुमान मंदिर से लगी बावड़ी शामिल है, जिसे जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत 5 जून को आयोजित बावड़ी उत्सव में सहेजने का संकल्प लिया गया। बावड़ी उत्सव में जन अभियान परिषद द्वारा स्थानीय नागरिकों के सहयोग से न केवल इसकी साफ-सफाई की गई बल्कि इसे एक बार फिर वर्षा जल संचयन के लिये उपयोगी बना दिया गया। सैकड़ों वर्ष पुरानी इस बावड़ी की साफ़ सफाई के लिए किए गए श्रमदान का नेतृत्व विधायक श्री सुशील कुमार तिवारी इंदु ने किया। क्षेत्र के लगभग सभी जनप्रतिनिधि इस कार्य में उनके सहयोगी बने। आज एक बार फिर कचरे से अटी पड़ी पनागर की यह ऐतिहासिक इस बावड़ी का स्वरूप निखर के लोगों के सामने है। इसका खूबसूरत प्रवेश द्वार, प्राचीन संस्कृति की झलक दिखाती सीढ़ियां, नक्काशीदार स्तंभ और सैकड़ों वर्ष पहले की जल संचयन की व्यवस्था देखने लोगों को यहाँ कुछ पल रुकने के लिये मजबूर कर रहा है।

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