पलपल इंडिया प्रतिनिधि। एक ऐतिहासिक विरासत, एक यादगार इंजीनियरिंग का नमूना और हजारों ग्रामीणों की जीवनरेखा माने जाने वाला जमतरा पुल अब इतिहास बन गया है। नर्मदा नदी पर बना यह 97 साल पुराना रेलवे पुल दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे ने पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। ग्रामीणों ने विरोध किया, गुहार लगाई, जनप्रतिनिधियों से मदद मांगी, लेकिन अंततः यह पुल कबाड़ी के हाथों नीलाम कर खत्म कर दिया गया। ग्रामीणों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के ना बोलने के कारण सहज आवागमन का साधन खत्म हो गया।
ब्रिटिश शासन के दौरान 1927 में बने पुल को रेलवे ने पहले जर्जर घोषित किया और फिर तीन करोड़ रुपए के ऑनलाइन टेंडर के तहत इसे तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह पुल मजबूत स्टील से बना था और उसे काटने में मजदूरों को एक सप्ताह का समय लग गया। पुल की डिजाइन इंग्लैंड से आई थी और इसकी मजबूती कोलकाता के हावड़ा ब्रिज जैसी मानी जाती थी।
ग्रामीणों ने कैंट और बरगी के विधायकों से लेकर सांसद तक सभी जनप्रतिनिधियों से मदद मांगी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। इससे नाराज ग्रामीण अब जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। 2021 में भी पुल तोड़ने की कोशिश की गई थी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध से काम रुक गया था। इस बार विरोध के बावजूद कोई रुकावट नहीं आई।