पलपल इंडिया प्रतिनिधि। घटना फरवरी 2025 की बताई जा रही है. जहाँ इस ठगी की वजह से सरकारी योजना को चूना लगाया गया, वहीं काम की तलाश में भटक रही वास्तविक महिला मजदूरों को रोजगार से वंचित होना पड़ा.
कर्नाटक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा में फर्जीवाड़ा होने का मामला सामने आया है. मनरेगा में ये फर्जीवाड़ा कर्नाटक के यादगीर जिले के मालदार गांव में हुआ है. दरअसल, जिले के मालदार गांव में कुछ पुरुष मजदूरों ने साड़ी पहनकर महिलाओं के नाम पर मनरेगा में मजदूरी की, जबकि जो असली महिला मजदूर हैं उन्होंने काम ही नहीं किया. रंग बिरंगी साड़ियों में लिपटी इन महिलाओं ने घूंघट काढ़ रखा था और शर्मिली चाल से चलने की कोशिश कर रही थी. लेकिन उनके हाव-भाव देखकर शक गहराया तो अधिकारियों ने उनका घूंघट हटवाकर देखा तो हैरान रह गए. उस घूंघट के पीछे से पुरुषों का चेहरा निकला. इन्होंने महिलाओं को वेष धरकर सरकारी स्कीम से करीब 3 लाख रुपये का फायदा उठा लिया.
ये फर्जीवाड़ा नाला गहरीकरण परियोजना के दौरान सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल हो जाने के बाद सामने आया. वायरल तस्वीरों में कुछ पुरुष साड़ी पहनकर मजदूरी करते नजर आए. मल्लार गांव के एक किसान निंगप्पा पुजारी के खेत में पुरुष साड़ी पहनकर काम कर रहे थे. इस परियोजना की कुल लागत 3 लाख रुपये बताई जा रही है.
मल्हार गांव के पंचायत विकास अधिकारी चेन्नबसवा ने कहा, ‘इस मामले में मेरी कोई भूमिका नहीं है. एक आउटसोर्स कर्मचारी ने यह सब किया और मुझे इसकी जानकारी नहीं थी. जब मामला सामने आया, तो मैंने उस कर्मचारी को सस्पेंड कर दिया. अब गांव में मनरेगा योजना के तहत काम सुचारू रूप से चल रहा है. हमने 2,500 मजदूरों को काम मुहैया कराया है.’