Heavy rain: मध्यप्रदेश में बारिश का नया सिस्टम एक्टिव हो गया है। एक मानसून टर्फ प्रदेश के बीच में से गुजर रही है। इसके चलते इंदौर, भोपाल, जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग में असर देखने को मिलेगा। राजस्थान में मानसून की बापसी होने लगी है इसी कारण मध्यप्रदेश में भी मानसून वापिस आने की संभावना है।
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक़ पिछले दिन मानसून टर्फ की एक्टीविटी देखने को मिली। वहीं अन्य सिस्टम भी एक्टिव है। जिसके चलते अगले 24 घंटे के दौरान भी तेज बारिश होने के आसार है। प्रदेश में अब तक औसत 41.9 इंच बारिश हो चुकी है, जो कोटे से 11 प्रतिशत अधिक है। 30 से ज्यादा जिलों में सामान्य बारिश का कोटा फुल हो चुका है। मालवा-निमाड़ यानी इंदौर-उज्जैन संभाग में हाल बुरे हैं। 15 में से 5 जिले खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, शाजापुर और बड़वानी में 27 इंच पानी भी नहीं गिरा है।

अभी तक प्रदेश में कोटे से 4.4 इंच अधिक बारिश- प्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 41.9 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 34.5 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.4 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। यह कोटा पिछले सप्ताह ही पूरा हो गया है। 4.9 इंच पानी ज्यादा गिर गया है।
वहीं भोपाल, राजगढ़, बड़वानी, कटनी, रायसेन, विदिशा, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अलीराजपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़,मंडला, अशोकनगर, दतिया, निवाड़ी, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, रतलाम, मंदसौर, मुरैना,सिंगरौली, सीधी, श्योपुर, सतना और उमरिया में बारिश का कोटा फुल हो चुका है। कई जिले ऐसे हैं जहां आंकड़ा डेढ़ सौ प्रतिशत के पार है। श्योपुर में कुल 213 प्रतिशत पानी गिर चुका है।
मौसम विभाग के मुताबिक 14 सितंबर को सुबह 8.30 बजे पर उत्तरी तेलंगाना और उससे सटे विदर्भ पर निम्न दबाव का क्षेत्र एक्टिव हुआ है। इससे जुड़ा चक्रवातीय परिसंचरण समुद्र तल से 4.5 किमी. ऊपर तक फैला हुआ है जो दक्षिण की ओर झुका हुआ है। इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर विदर्भ और आसपास के मध्य भागों की ओर बढ़ने की संभावना है। इसके बाद इसके एक अवशिष्ट ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण के रूप में लगभग उत्तर की ओर बढ़ने की संभावना है।

एमपी में अगर पूर्वी हिस्से की बात करें तो जबलपुर, रीवा, सागर व शहडोल संभाग में तेज बारिश हुई है। यहां बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव रहे। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया सहित कई जिलों में बाढ़ आ गई। ग्वालियर-चंबल में भी मानसून जमकर बरसा है। यहां के सभी 8 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। इनमें ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया व श्योपुर शामिल हैं।
सबसे ज्यादा बारिश वाले टॉप-5 जिलों की बात करें तो गुना नंबर 1 पर है। यहां 65 इंच बारिश हो चुकी है। मंडला में 57.3 इंच, श्योपुर में 56.3 इंच, शिवपुरी में 54.3 इंच और अशोकनगर में 54.1 इंच पानी गिरा है। वहीं खरगोन में सबसे कम 25.7 इंच बारिश हो चुकी है। बुरहानपुर में 25.9 इंच, खंडवा में 26.8 इंच, शाजापुर में 26.8 इंच और बड़वानी में 26.9 इंच बारिश हुई है।

सितंबर महीने में जबलपुर में भी मानसून जमकर बरसता है। 20 सितंबर 1926 को जबलपुर में 24 घंटे के अंदर साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड है। वहीं पूरे महीने में 32 इंच बारिश साल 1926 को हो चुकी है। यहां महीने में औसत 10 दिन बारिश होती है। वहीं सामान्य बारिश साढ़े 8 इंच है। पिछले 3 साल से सामान्य से ज्यादा पानी गिर रहा है।
बता दें कि प्रदेश में अब तक औसत 41.9 इंच बारिश हो चुकी है, जो कोटे से 11 प्रतिशत अधिक है। 30 से ज्यादा जिलों में सामान्य बारिश का कोटा फुल हो चुका है। मालवा-निमाड़ यानी, इंदौर-उज्जैन संभाग में हाल बुरे हैं। 15 में से 5 जिले-खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, शाजापुर और बड़वानी में 27 इंच पानी भी नहीं गिरा है।